रायगढ़ : सामाजिक समाघात आकलन रिपोर्ट में कथित फर्जी हस्ताक्षर का आरोप, किसानों ने की FIR की मांग
रायगढ़। पुसौर क्षेत्र के ग्राम कोतरमरा में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सामाजिक समाघात आकलन रिपोर्ट को लेकर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों और किसानों ने थाना प्रभारी पुसौर को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में ग्राम पंचायत प्रतिनिधि के नाम के सामने ऐसा हस्ताक्षर दर्ज है, जिसे संबंधित प्रतिनिधि अपना हस्ताक्षर नहीं मान रही हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
जनसुनवाई में मौजूद नहीं थीं, रिपोर्ट में दर्ज मिला हस्ताक्षर
आवेदन के अनुसार 19 जून 2026 को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोतरमरा में भूमि अर्जन के लिए सामाजिक समाघात आकलन को लेकर जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इसके लिए गठित दल ‘ख’ में स्थानीय निकाय की प्रतिनिधि के तौर पर ग्राम पंचायत कोतरमरा की प्रतिनिधि राजकुमारी पटेल का नाम क्रमांक-2 पर दर्ज था।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि राजकुमारी पटेल जनसुनवाई की कार्रवाई में मौजूद नहीं थीं। इसके बावजूद 20 जुलाई 2026 को सामाजिक समाघात आकलन दल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में उनके नाम के सामने अंग्रेजी में हस्ताक्षर दर्ज पाया गया।
राजकुमारी पटेल ने हस्ताक्षर से किया इनकार
शिकायत में कहा गया है कि जब ग्रामीणों ने राजकुमारी पटेल से रिपोर्ट में दर्ज हस्ताक्षर को लेकर जानकारी ली, तो उन्होंने कथित तौर पर इसे अपना हस्ताक्षर मानने से इनकार किया।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक राजकुमारी पटेल का कहना है कि वह अंग्रेजी में हस्ताक्षर नहीं करती हैं। यदि यह दावा सही है, तो रिपोर्ट में दर्ज हस्ताक्षर किसने किए और किस आधार पर दस्तावेज में शामिल हुआ, यह जांच का विषय है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ा मामला
पूरा मामला भूमि अधिग्रहण के लिए तैयार की जा रही सामाजिक समाघात आकलन प्रक्रिया से संबंधित है। शिकायत के साथ कलेक्टोरेट रायगढ़ भू-अर्जन से संबंधित आदेश और ग्राम कोतरमरा, तहसील पुसौर के राजस्व दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न किए जाने की जानकारी दी गई है।
ऐसे में शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेज में दर्ज कथित हस्ताक्षर की प्रमाणिकता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि जनसुनवाई की कार्यवाही और बाद में तैयार रिपोर्ट में संबंधित प्रतिनिधि की उपस्थिति एवं हस्ताक्षर का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी स्थिति
ग्रामीणों और किसानों की ओर से दिए गए आवेदन में पूरे मामले की जांच कर एफआईआर दर्ज करने तथा उचित कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन के साथ कई ग्रामीणों और किसानों के हस्ताक्षर भी संलग्न बताए गए हैं।
फिलहाल रिपोर्ट में दर्ज हस्ताक्षर वास्तव में किसके हैं और इसे दस्तावेज में किस परिस्थिति में शामिल किया गया, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि जांच में हस्ताक्षर फर्जी पाए जाते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगा।










